छोटी जिंदगी रही मगर कामयाब जिंदगी रही

छोटी जिंदगी रही मगर कामयाब जिंदगी रही

Capt. Vijyant Thapar, VrC (P)

Kargil Vijay Diwas Week…

वीरों की इन गाथाओं को साझा करने का सिर्फ एक कारण है कि यह वास्तविक किस्से कहानियां हमारे बच्चों तक, हमारे युवाओं तक पहुंचे और वह इस से प्रेरणा लेकर जीवन में कुछ बनने की ठान लें, कुछ कर गुजरने की ठान लें। सभी लोग इन कहानियों को इन घटनाओं को अपने बच्चों तक अवश्य पहुंचाएं मैं लगातार एक हफ्ते तक कारगिल सप्ताह के अंतर्गत ये कहानियां आप तक पहुंचाती रहूंगी।

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कारगिल युद्ध में मातृभूमि की रक्षा की ख़ातिर प्राण न्यौछावर करने वाले जवानों की अमर शहादत को विनम्र श्रद्धांजलि।

टाइगर हिल की लड़ाई, वायु सेना द्वारा हमले, और अमेरिका की कूटनीतिक दखलअंदाज़ी के बाद 14 जुलाई, 1999 को ऑपरेशन विजय को सफल घोषित किया गया।

“औरों के घर आग लगाने का सपना,
सदा अपने ही घर में हरा होता है”

इस युद्ध मैं करारी हार और अपने जान माल के नुकसान के पश्चात पाकिस्तान ने इस बात के मर्म को अवश्य ही समझा होगा।

इस विहंगम और भीषण घमासान ने वीरता की अनेकों दास्तानें दी। 26 जुलाई, 1999 को अंततः भारतीय सेना ने कारगिल युद्ध में विजय प्राप्त कर तिरंगे और भारत देश का मान बढ़ाया।
यह जीत सदियों तक “कारगिल विजय” दिवस के रूप में मनाई जाती रहेगी और वीरों के बलिदान की अमर‌ गाथाएं विश्व-पटल पर अमरत्व के शिलालेख पर उत्कीर्ण रहेगी।

" हर कतरा मैं खून का भारत भू की रक्षा में समर्पित करता हूं,
मातृभूमि की रक्षा खातिर, यह जान बलिवेदी पर रखता हूं।
वीरों ने यह शहादत दे अपना कर्ज चुकाया है,
अमर शहादत दे भूमि को,पावन अमरत्व कमाया है।

Capt. Vijyant Thapar, VrC (P)- As yet another 26th July nears, here’s another salute to this man! No tributes can ever be sufficient to acknowledge his deeds! the memories and achievements of this man and his unit can’t be glorified enough!

विजयंत थापर… 22 साल के इस नौजवान का सपना देश के लिए अपना सबकुछ न्योछावर करने का था। बचपन से ही एक ही सपना था भारतीय सेना में जाने का। उन्होंने अपने जीवन में कुछ और करने के लिए कभी सोचा ही नहीं। कैप्टन विजयंत की पहली पोस्टिंग कश्मीर के कुपवाड़ा में हुई, जहां आतंक सर उठा रहा था…।

सेना में विजयंत को सिर्फ तीन महीने ही हुए थे, जब कारगिल युद्ध छिड़ गया । विजयंत अपने कमांडिग ऑफिसर के कमांड पर द्रास पहुंचे, जहां बटालियन 2 राजपूताना राइफल्स को तोलोनिंग से दुश्मनों को मार भगाने का मिशन मिला। 12 जून 1999 को लगातार लड़ाई के बाद तोलोनिंग पर तिरंगा लहराया गया। विजयंत के सामने तोलोलिंग के बाद दूसरी चुनौती थी पिंपल्स और नॉल पर कब्जा करना, जहां से दुश्मन छिपकर गोलियां बरसा रहे था। पंद्रह हजार फीट की ऊंचाई और सीधी चढ़ाई भी विजयंत थापर के हौसलों को डिगा नहीं सकी। इस मुश्किल मिशन में उनकी टुकड़ी के कई जांबाज शहीद हो चुके थे, लेकिन विजयंत थापर आगे बढ़ने से रुके नहीं…
वक्त ने विजयंत को उस समय थाम लिया, जब एक सीधी गोली उनके माथे पर लगी और शहादत का तिलक कर गई… और देश की रक्षा में उन्होंने अपना सर्वस्व निछावर कर दिया। सिर्फ 6 महीनों की नौकरी हे इतने से कार्यकाल में ही पूरी जिंदगी जी ली और शहादत पर हंसते-हंसते दस्तखत कर दिया….

विनम्र श्रद्धांजलि
जय हिंद! जय भारत!
स्क्वाड्रन लीडर राखी अग्रवाल

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